Sunday, May 10, 2009
एक और बुद्धन आएगा डाॅ अनीता पंडा खामोशी से निकल गया था वह,विकास की तलाश में अर्जित करने ज्ञान का प्रकाश कुछ रश्मियाँ हाथ आईं सरस्वती की कृपा थी उस परबढ़ता गया बिना सीढ़ियों के जीवट था, हर पल थपेड़ा सहताजन्मगत अभिशाप काचाह थी उसे केवल अपने समुदाय के विकास कीअपनी मिट्टी, वन कीअपने ढोल, नृत्य की अपनी स्त्रियों की अस्मिता कीबेमौत मारे जाते युवाओं कीकिसान से मजूर बनने की प्रक्रिया कादला गया वह, मारा गया, प्राप्त था उसे कानूनन अधिकार समानता का, अनभिज्ञ था वह, शिक्षित समाज से विचारों के दोगलेपन सेउसके लौटने का है इन्तजार आखिरी साँस के पहले, उसे निहार ले, छू ले नहीं पता है माँ को निकल गया है वह खामोशी से नहीं लौटता है कोई वहाँ सेबुद्धन, लिए ज्ञान का प्रकाश अब कभी नहीं आएगा पर आत्मा नहीं होगी पराजित एक और बुद्धन आएगा। Typing
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